Message # 448217

जब सड़कछाप नुक्कड़ नाटक तमाशा करनेवाले भांड राजनीती मे आते है तो राजनीती भी एक तमाशा बनकर रहजाती है।
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पता नहीं लोग कैसे मुफ्तखोरी के झासे में आकर इन भांडों को वोट देते है. "नंगा नहाए क्या और निचोड़े क्या", कहावत इन्हीं लोगो के लिए बनी है ArvindKejriwal

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