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*सेंधा नमक के फायदा*

1. सेंधा नमक हड्डियों को मजबूत रखता है।
2. मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या सेंधा नमक के सेवन से ही ठीक हो सकती है।
3. नियमित सेंधा नमक का सेवन करने से प्राकृतिक नींद आती है। यह अनिंद्रा की तकलीफ को दूर करता है।
4. यह साइनस के दर्द को कम करता है।
5. शरीर में शर्करा को शरीर के अनुसार ही संतुलित रखता है।
6. पाचन तंत्र को ठीक रखता है।
7. यह शरीर में जल के स्तर की जांच करता है जिसकी वजह से शरीर की क्रियाओं को मदद मिलती है।
8. पित्त की पत्थरी व मूत्रपिंड को रोकने में सेंधा नमक और दूसरे नमकों से बेहद उपयोगी है।
9. पानी के साथ सेंधा नमक लेने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है।
10. यह नमक वजन को नियंत्रित करता है क्योंकि यह शरीर में पाचक रसों का निर्माण करता है। जिससे खाना जल्दी पच जाता है और कब्ज भी दूर हो जाती है।

 
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akshay parekh

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🤔 यूरोप की विवशता.... हमारी मूर्खता... 🤔

1. *आठ महीने ठण्ड पड़ने के कारण
कोट पैंट पहनना उनकी विवशता और
शादी वाले दिन भरी गर्मीं में कोट - पैंट डाल कर
बरात ले कर जाना हमारी मुर्खता !*

2. *ताजा भोजन उपलब्ध ना होने के कारण
सड़े आटे से पिज्जा,, बर्गर,, नूडल्स आदि खाना
यूरोप की विवशता और 56 भोग छोड़
₹ 400/- की सड़ी रोटी (पिज्जा ) खाना हमारी मुर्खता !*

3. *ताज़ा भोजन की कमी के कारण
फ्रीज़ का इस्तेमाल करना यूरोप की विवशता और
रोज दो समय ताजी सब्जी बाजार में मिलनें पर भी
हफ्ते भर की सब्जी मण्डी से लेकर
फ्रीज में ठूँस कर सड़ा - सड़ा कर उसे खाना
हमारी मुर्खता !*

4. *जड़ी - बूटियों का ज्ञान ना होने के कारण...
जीव जन्तुओं के हाड़ - माँस से दवायें बनाना
उनकी विवशता और आयुर्वेद जैसा महान चिकित्सा ग्रन्थ होने के बावजूद उन हाड़ - माँस की दवाईयाँ
उपयोग करना हमारी महांमुर्खता !*

5. *पर्याप्त अनाज ना होने के कारण
जानवरों को खाना उनकी विवशता और
1600 किस्मों की फसलें होनें के बावजूद
जीभ के स्वाद के लिए
किसी निरीह प्राणी को मार कर
उसे खाना हमारी मुर्खता !*

6. *लस्सी, दूध, जूस आदि ना होने के कारण
कोल्ड ड्रिंक को पीना उनकी विवशता और
36 तरह के पेय पदार्थ होते हुऐ भी
इस कोल्ड ड्रिंक नामक जहर को पी कर
खुद को आधुनिक समझ कर इतराना
हमारी महा महा महा मुर्खता !*
🙏
*विशेष अनुरोध :-
"एक बार विशुद्ध भारतीय सँस्कृति पर
अवश्य विचार करें"।।*🙏🙏

 
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36 days
 
akshay parekh

*चरण छूकर प्रणाम करने के होते हैं यह जबरदस्त फायदे..*

अपने से बड़ों का अभिवादन करने के लिए चरण छूने की परंपरा सदियों से रही है।

सनातन धर्म में अपने से बड़े के आदर के लिए चरण स्पर्श उत्तम माना गया है. प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर चरण स्पर्श के कई फायदे हैं.

1.  चरण छूने का मतलब है पूरी श्रद्धा के साथ किसी के आगे नतमस्तक होना. इससे विनम्रता आती है और मन को शांति मिलती है. साथ ही चरण छूने वाला दूसरों को भी अपने आचरण से प्रभावित करने में कामयाब होता है।

2.  जब हम किसी आदरणीय व्यक्ति के चरण छूते हैं, तो आशीर्वाद के तौर पर उनका हाथ हमारे सिर के उपरी भाग को और हमारा हाथ उनके चरण को स्पर्श करता है। ऐसी मान्यता है कि इससे उस पूजनीय व्यक्ति की पॉजिटिव एनर्जी आशीर्वाद के रूप में हमारे शरीर में प्रवेश करती है. इससे हमारा आध्यात्मिक तथा मानसिक विकास होता है।

3. शास्त्रों में कहा गया है कि हर रोज बड़ों के अभि‍वादन से आयु, विद्या, यश और बल में बढ़ोतरी होती है।

4.  इसका वैज्ञानिक पक्ष इस तरह है: न्यूटन के नियम के अनुसार, दुनिया में सभी चीजें गुरुत्वाकर्षण के नियम से बंधी हैं. साथ ही गुरुत्व भार सदैव आकर्षित करने वाले की तरफ जाता है। हमारे शरीर पर भी यही नियम लागू होता है. सिर को उत्तरी ध्रुव और पैरों को दक्षिणी ध्रुव माना गया है। इसका मतलब यह हुआ कि गुरुत्व ऊर्जा या चुंबकीय ऊर्जा हमेशा उत्तरी ध्रुव से प्रवेश कर दक्षिणी ध्रुव की ओर प्रवाहित होकर अपना चक्र पूरा करती है।
यानी शरीर में उत्तरी ध्रुव (सिर) से सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश कर दक्षिणी ध्रुव (पैरों) की ओर प्रवाहित होती है. दक्षिणी ध्रुव पर यह ऊर्जा असीमित मात्रा में स्थिर हो जाती है। *पैरों की ओर ऊर्जा का केंद्र बन जाता है. पैरों से हाथों द्वारा इस ऊर्जा के ग्रहण करने को ही हम \'चरण स्पर्श\' कहते हैं।*

5.  चरण स्पर्श और चरण वंदना भारतीय संस्कृति में सभ्यता और सदाचार का प्रतीक है।

6.  माना जाता है कि पैर के अंगूठे से भी शक्ति का संचार होता है. मनुष्य के पांव के अंगूठे में भी ऊर्जा प्रसारित करने की शक्ति होती है।

7.  मान्यता है कि बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श नियमित तौर पर करने से कई प्रतिकूल ग्रह भी अनुकूल हो जाते हैं।

8.  इसका मनोवैज्ञानिक पक्ष यह है कि जिन लक्ष्यों की प्राप्त‍ि को मन में रखकर बड़ों को प्रणाम किया जाता है, उस लक्ष्य को पाने का बल मिलता है।

9.  यह एक प्रकार का सूक्ष्म व्यायाम भी है. पैर छूने से शारीरिक कसरत होती है. झुककर पैर छूने, घुटने के बल बैठकर प्रणाम करने या साष्टांग दंडवत से शरीर लचीला बनता है।

10.  आगे की ओर झुकने से सिर में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जो सेहत के लिए फायदेमंद है।

11.  प्रणाम करने का एक फायदा यह है कि इससे हमारा अहंकार कम होता है. इन्हीं कारणों से बड़ों को प्रणाम करने की परंपरा को नियम और संस्कार का रूप दे दिया गया है।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि केवल उन्हीं के चरण स्पर्श करना चाहिए, जिनके आचरण ठीक हों. \'चरण\' और आचरण\' के बीच भी सीधा संबंध है।

घुटने छूने की परम्परा से छुटकारा पाये... इससे तो अच्छा है ना छुये।

ॐ ॐ ॐ

 
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39 days
 
DDLJ143

*36 दिन का दिल्ली का वो सुल्तान, जिसने मंगोलों को हराया*

हिंदुस्तान का इतिहास रोचक किस्सों से भरा हुआ है. वो किस्से, जिन्हें सुनकर चौंक जाओ. ऐसा ही एक किस्सा है जब 36 दिन तक हिंदुस्तान का बादशाह एक ट्रांसजेंडर था. नाम था *मलिक काफूर*.
इसके सुल्तान बनने का समय बहुत ही कम था. मगर काफूर को कई वजहों से इतिहास में जाना जाता है. कहा तो ये भी जाता है कि काफूर हिंदुस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा क्रिमिनल कॉन्सपिरेटर था जो सुल्तान भी बना. मार्च और अप्रैल में फागुन की तारीफ में तमाम गीत और कविताएं लिखी जाती हैं. 14वीं शताब्दी में इन्हीं महीनों में मलिक काफूर का खौफ दिल्ली और हिंदुस्तान को दहला रहा था. काफूर के बारे में मुस्लिम इतिहासकार ज़ियाउद्दीन बरनी, अमेरिकी स्कॉलर वैंडी डॉनिंगर और आदित्य बहल की किताब \'लव स्टब्ल मैजिक\' में काफी विस्तार से लिखा गया है.

*क्यों है मलिक काफूर खास*

मलिक काफूर ने अलाउद्दीन खिलजी के जनरल के तौर पर तमिलनाडु तक जीत दर्ज की. काफूर इतनी बड़ी जीत दर्ज करने वाला पहला सेनानायक है.

काफूर ने ही वारंगल के अभियान में कोहिनूर हीरा लूटा. हिंदुस्तान के इतिहास में कोहिनूर का ज़िक्र यहीं से शुरू होता है.

काफूर ने अमरोहा की लड़ाई में अजेय माने जानेवाले मंगोलों को हराया.

*कौन था मलिक काफूर*

1297 ईसवी में अलाउद्दीन खिलजी ने गुजरात पर चढ़ाई की. इतिहासकार बरनी के अनुसार, इस अभियान में गुजरात में पाटन के राजा कर्ण सिंह ने भागकर पड़ोस के राज्य में शरण ली. मगर कर्ण सिंह की रानी कमला देवी को सेना ने गिरफ्तार करके सुल्तान खिलजी के सामने पेश किया. खिलजी ने कमला देवी से शादी करके उन्हें हरम में भेज दिया. ये किसी मुसलमान बादशाह से हिंदू रानी/राजकुमारी की पहली शादी थी. इसी दौरान खिलजी की नज़र एक खूबसूरत जवान लड़के मलिक मानिक पर पड़ी. खिलजी ने उस गुलाम को लाने वाले को हज़ार दीनार दिए और मानिक को बंध्या बनवाकर अपने पास रख लिया. उसे नया नाम दिया गया मलिक काफूर.

*काफूर और खिलजी*

काफूर देखते ही देखते खिलजी का खास बन गया. उसकी मिलिट्री स्किल्स के चलते खिलजी साम्राज्य दिल्ली स्ल्तनत का सबसे बड़ा साम्राज्य बन गया. साथ ही खिलजी के साथ काफूर के प्रेम संबंध भी थे. अपनी तेज़ी से हुई तरक्की के चलते काफूर ने बाकी के सरदारों को अपना दुश्मन बना लिया. ऊपर से कई ऐसे लोग भी थे जो एक ऐसे वज़ीर से हुक्म लेना पसंद नहीं करते थे जो मर्द नहीं था.

खुद हार कर भी जीतने वाले का पूरा खजाना ले लिया

काफूर मिलिट्री स्किल्स के साथ-साथ कूटनीति में भी माहिर था. पांड्य साम्राज्य पर हमला कर के काफूर ने घेराबंदी कर ली थी. भीषण गर्मियों में की गई इस घेराबंदी में कावेरी नदी भी शामिल थी. मगर एक रात पांड्य सेना ने अचानक हमला कर के काफूर की आधी से ज़्यादा सेना को खत्म कर दिया. काफूर ने हार मानने की जगह पांड्य राजा से समझौता किया अगर राजा वीर पांड्यन उसे वापस जाने दें वो अपने कब्ज़े में आए मीनाक्षी मंदिर और शहर को छोड़ देगा. कमज़ोर सेना के बाद भी काफूर ने मंदिर वापस देने का वादा कर वीर पांड्यन का पूरा खजाना, आधा राशन और सारे हाथी ले लिए. खिलजी ने खुश होकर इसके बाद काफूर को \'मलिक नायक\'  बना दिया. वैसे समझौता होने के पहले तक मीनाक्षी मंदिर का बड़ा हिस्सा तोड़ा जा चुका था जो 15वीं शताब्दी में दुबारा बना.

*खिलजी के खिलाफ साजिश*

काफूर की ख्वाहिशें बढ़ती ही जा रहीं थी. खिलजी के बीमार पड़ने पर उसने सुल्तान को नज़रबंद कर लिया. कुछ इतिहासकारों का ये भी मत है कि काफूर ने ही धीमा जहर देकर खिलजी को मौत तक पहुंचाया. बहरहाल हत्या के तुरंत बाद काफूर ने खिलजी के बेटों को अंधा करवा दिया. बेग़मों को जेल में डाला. सारे सरदारों को कत्ल करने का हुकुम दे दिया और खिलजी के 3 साल के बेटे को गद्दी पर बैठाने की बात करके खुद सुल्तान बन गया.

*क्रूरता के दौर और फिर हत्या*

काफूर ने 35 दिनों में खूब कत्ल-ए-आम किया. शाही परिवार के साथ-साथ उसे जो भी नापसंद हुआ मारा गया. खिलजी के बेटे शादी खां को उसने सीरी के किले में कैदी बना लिया. काफूर के हुकुम पर शहज़ादे की आंखें उस्तरे से चीरा लगाकर निकाली गईं, जैसे फांकों से तरबूज़ छीलकर निकाला जाता है.

इन सबके बीच अलाउद्दीन का तीसरा बेटा मुबारक खिलजी किसी तरह बच निकला. उस दौर के इतिहासकार बरनी के दस्तावेजों में ज़िक्र मिलता है कि काफूर ने जिन सैनिकों को मुबारक को मारने भेजा था, वो मुबारक से मिल गए. इन्हीं सैनिकों ने वापस आकर सोते समय काफूर की गर्दन काट दी. इस तरह एक महीने के शासन के बाद काफूर इतिहास की किताबों का किस्सा बनकर रह गया.

 
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50 days
 
Sam's Son

*Advice to seniors.*

A study in United States shows over 51% of old people fall down from climbing stairs. Every year, many Americans are killed by climbing stairs.

*Experts Reminder:*

After 65 years, these 10 actions should be avoided:

1 Do not climb staircase. If must climb, hold on firmly to staircase railings.

2 Do not rapidly twist your head. Warm up your whole body first.

3 Do not bend your body to touch your toe. Warm up your whole body first.

4 Do not stand to wear your pants. Wear your pants while sitting down.

5 Do not sit up when lying face up. Sit up from one side (left hand side, or right hand side) of your body.

6 Do not twist your body before exercise. Warm up whole first.

7 Do not walk backwards. Falling backwards can result in serious injury.

8 Do not bend waist to lift heavy weight. Bend your knees and lift up heavy object while half squatting.

9 Do not get up fast from bed. Wait a few minutes before getting up from bed.

10 Do not over force defecation. Let it come naturally.

Please share with all seniors.

 
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55 days
 
Jasmine

*🌺🥀शयन के नियम🥀🌺*

🌺सूने घर में अकेला नहीं सोना चाहिए। देवमन्दिर और श्मशान में भी नहीं सोना चाहिए। *(मनुस्मृति)*
🌺किसी सोए हुए मनुष्य को अचानक नहीं जगाना चाहिए। *(विष्णुस्मृति)*
🌺विद्यार्थी, नौकर औऱ द्वारपाल, ये ज्यादा देर तक सोए हुए हों तो, इन्हें जगा देना चाहिए। *(चाणक्यनीति)*
🌺स्वस्थ मनुष्य को आयुरक्षा हेतु ब्रह्ममुहुर्त में उठना चाहिए। *(देवीभागवत)*
🌺बिल्कुल अंधेरे कमरे में नहीं सोना चाहिए। *(पद्मपुराण)*
🌺भीगे पैर नहीं सोना चाहिए। सूखे पैर सोने से लक्ष्मी (धन) की प्राप्ति होती है। *(अत्रिस्मृति)*
🌺टूटी खाट पर तथा जूठे मुंह सोना वर्जित है। *(महाभारत)*
🌺नग्न होकर नहीं सोना चाहिए। *(गौतमधर्मसूत्र)*
🌺पूर्व की तरफ सिर करके सोने से विद्या, पश्चिम की ओर सिर करके सोने से प्रबल चिन्ता, उत्तर की ओर सिर करके सोने से हानि व मृत्यु, तथा दक्षिण की तरफ सिर करके सोने से धन व आयु की प्राप्ति होती है। *(आचारमय़ूख)*
🌺दिन में कभी नही सोना चाहिए। परन्तु जेष्ठ मास मे दोपहर के समय एक मुहूर्त (48 मिनट) के लिए सोया जा सकता है। *(जो दिन मे सोता है उसका नसीब फुटा है)*
🌺दिन में तथा सुर्योदय एवं सुर्यास्त के समय सोने वाला रोगी और दरिद्र हो जाता है। *(ब्रह्मवैवर्तपुराण)*
🌺सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घंटे) के बाद ही शयन करना चाहिए।
🌺बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिये हितकर हैं।
🌺दक्षिण दिशा (South) में पाँव रखकर कभी नही सोना चाहिए। यम और दुष्टदेवों का निवास रहता है। कान में हवा भरती है। मस्तिष्क में रक्त का संचार कम को जाता है स्मृति- भ्रंश, मौत व असंख्य बीमारियाँ होती है।
🌺ह्रदय पर हाथ रखकर, छत के पाट या बीम के नीचें और पाँव पर पाँव चढ़ाकर निद्रा न लें।
🌺शय्या पर बैठकर खाना-पीना अशुभ है।
🌺सोते सोते पढना नही चाहिए।
🌺ललाट पर तिलक लगाकर सोना अशुभ है। इसलिये सोते वक्त तिलक हटा दें।

जय दुःख भंजन 🌹🌹🌹

 
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56 days
 
akshay parekh

*आइंस्टाइन की लिखी इस चिट्ठी में छुपा है दुनिया की बर्बादी का फ़ॉर्म्युला*

आइंस्टाइन ने अगस्त 1939 में एक चिट्ठी लिखी थी. ये चिट्ठी 11 अक्टूबर, 1939 को अपनी मंजिल पर पहुंची. ये चिट्ठी इतिहास के सबसे अहम दस्तावेजों में से एक है. दुनिया आज जिन न्यूक्लियर हथियारों के ढेर पर बैठी है, उसकी बुनियाद में ये चिट्ठी ही है. दुनिया में आज तक केवल दो जगहों पर परमाणु हमले हुए. जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर. ऐटम बमों के इन हमलों से भी आइंस्टाइन का बहुत करीबी रिश्ता था. ये जो इतिहास है, वो 11 अक्टूबर की इस तारीख के साथ नत्थी है.

अल्बर्ट आइंस्टाइन. विज्ञान का सबसे लोकप्रिय चेहरा. E=mc2. इस छोटे से फॉर्मूले ने दुनिया बदल दी. थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी. विश्व की अब तक की सबसे महानतम खोजों में से एक. इसी के दम पर आइंस्टाइन को अब तक का महानतम वैज्ञानिक मानते हैं. आइंस्टाइन निर्माण में यकीन करते थे. खुद को अमनपसंद, शांतिवादी कहते थे. वो थे भी. 1929 में आइंस्टाइन ने कहा था. अगर युद्ध छिड़ता है, तो वो वॉर सर्विस नहीं करेंगे. ना प्रत्यक्ष, ना अप्रत्यक्ष. उन्होंने कहा था:

भले ही लोग कहें कि युद्ध करने की वजह बहुत महान है, मैं तब भी जंग में शामिल नहीं होऊंगा.

जंग को नापसंद करने वाले आइंस्टाइन को जंग ने ही बदला. दूसरे विश्व युद्ध ने. वो अब भी शांति की वकालत करते थे, पर थोड़े बदल गए थे. उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट को एक चिट्ठी लिखी थी. आइंस्टाइन ने 2 अगस्त, 1939 को ये चिट्ठी लिखी थी. रूजवेल्ट को ये 11 अक्टूबर को मिली. इसमें उन्होंने रूजवेल्ट को परमाणु बम विकसित करने की सलाह दी थी. उन्होंने रूजवेल्ट को आगाह किया. बताया कि शायद जर्मनी न्यूक्लियर बम विकसित कर रहा है. दिलचस्प तो ये भी है कि आइंस्टाइन खुद भी जर्मनी के ही थे. सोचने की बात है. इतना अमनपसंद इंसान न्यूक्लियर बम बनाने की सलाह दे रहा था!

दूर से ही सही, लेकिन परमाणु बम से हुई बर्बादी के साथ आइंस्टाइन का नाम भी हमेशा-हमेशा के लिए जुड़ गया. उन्हें जिंदगी भर इसका अफसोस रहा. जब अमेरिका ने नागासाकी और हिरोशिमा पर न्यूक्लियर बम गिराया, तो आइंस्टाइन बहुत दुखी हुए थे. उन्होंने एक लेख भी लिखा था.आइंस्टाइन की वो चिट्ठी, जिससे शुरू हुआ विनाशकारी सफर कभी खत्म नहीं हुआ. इस चिट्ठी ने दुनिया में ऐसी न्यूक्लियर दौड़ शुरू की, जो चाहे तो सब हमेशा-हमेशा के लिए बर्बाद कर दे. इसके बाद ही अमेरिका ने प्रॉजेक्ट मैनहटन शुरू किया. 6 अगस्त, 1945 को हिरोशिमा पर जो ऐटम बम गिरा, उसका कोड नाम \'लिटिल बॉय\'था. 9 अगस्त, 1945 को नागासाकी पर \'फैट मैन\' गिराया गया. इन दोनों बमों का सफर आइंस्टाइन के हाथों लिखी चिट्ठी के साथ ही शुरू हुआ था. पढ़िए, आइंस्टाइन की उस चिट्ठी का हिंदी तर्जुमा.

अल्बर्ट आइंस्टाइन
ओल्ड ग्रोव रोड
नासू पॉइंट
पेकोनिक, लॉन्ग आइलैंड
2 अगस्त, 1939

सर,
ई फेरमी और एल सेजलार्ड के कुछ हालिया कामों से मुझे लगने लगा है कि जल्द ही यूरेनियम एक नए और बेहद अहम ऊर्जा स्रोत के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाने लगेगा. इस घटनाक्रम की कुछ बातों पर नजर रखे जाने की जरूरत है. अगर जरूरत पड़े, तो इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए. इन्हीं बातों को मद्देनजर रखते हुए कुछ बातों और तथ्यों को आपके ध्यानार्थ पेश करना मुझे अपना फर्ज लग रहा है.

पिछले चार महीनों के दौरान कुछ अहम चीजें हुई हैं. फ्रांस में जोलियट और अमेरिका में फेरमी और सेजलार्ड ने कुछ ऐसी चीजें की हैं, जिससे कुछ नई संभावनाएं पैदा हुई हैं. ऐसा लग रहा है कि बहुत बड़ी मात्रा में यूरेनियम के अंदर न्यूक्लियर चेन रिऐक्शन पैदा करना मुमकिन हो सकता है. इसके द्वारा बहुत बड़ी मात्रा में बिजली पैदा हो सकती है. साथ ही, इस प्रक्रिया से बहुत बड़ी मात्रा में रेडियम जैसे रेडियोऐक्टिव पदार्थ भी निकलेंगे. अब तो ऐसा लग रहा है कि आने वाले भविष्य में, बहुत जल्द ही, ऐसा करना मुमकिन हो जाएगा.

इस नई खोज के कारण बमों का बनना भी संभव हो सकेगा. हालांकि इसके बारे में अभी पुख्ता तौर पर तो नहीं कहा जा सकता है, लेकिन फिर भी ऐसा लग रहा है कि इस नई प्रक्रिया के कारण एक अलग तरह का बेहद शक्तिशाली बम बनाया जा सकेगा. इस तरह का एक इकलौता बम, जिसे नाव पर लादकर बंदरगाह ले जाया जाए और वहां फोड़ दिया जाए, तो पूरे बंदरगाह को ही तबाह कर देगा. इतना ही नहीं, इसका असर आस-पास के इलाकों को भी नष्ट कर देगा. इस तरह के बम बेहद वजनदार होंगे और इन्हें हवाई जहाज या विमानों के माध्यम से एक जगह से दूसरी जगह ले जाना बहुत मुश्किल साबित होगा.

अमेरिका के पास जो कच्चा यूरेनियम (अयस्क) है, वो बहुत खराब गुणवत्ता वाला है. इसकी मात्रा भी बहुत ज्यादा नहीं है. कनाडा और पूर्व चेकोस्लोवाकिया के पास बहुत अच्छी गुणवत्ता का यूरेनियम अयस्क मौजूद है. हालांकि कच्चे यूरेनियम का सबसे अहम स्रोत बेल्जियम कॉन्गो है.

इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आपको शायद ये बेहतर लगेगा कि अमेरिका के अंदर न्यूक्लियर चेन रिऐक्शन पर काम कर रहे वैज्ञानिकों और प्रशासन/सरकार के बीच एक किस्म का स्थायी संपर्क विकसित किया जाए. ऐसा करने का एक संभावित तरीका ये भी हो सकता है कि आप उन वैज्ञानिकों से संपर्क कायम करने की जिम्मेदारी अपने किसी भरोसेमंद इंसान को सौंप दें. ऐसा कोई शख्स जो अनाधिकारिक तौर पर ये जिम्मेदारी निभा सके. उसके ऊपर ये जिम्मेदारियां होंगी:

1. सरकारी महकमों से संपर्क कायम करना. उन्हें नई गतिविधियों और घटनाक्रमों के बारे में सूचित करना. सरकार क्या कार्रवाई करे, क्या कदम उठाए, इस बारे में सलाह देना. अनुशंसा देना. खासतौर पर ये सुनिश्चित करना कि अमेरिका को यूरेनियम की लगातार और अबाध आपूर्ति मिले.

2. इस संबंध में जो प्रयोग हो रहे हैं, उन्हें गति देना. उनकी रफ्तार बढ़ाना. फिलहाल ये प्रयोग विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं के अंदर सीमित हैं. इन प्रयोगों को फंड मुहैया कराना. अपने संपर्क के ऐसे लोगों से फंड का इंतजाम करना, जो कि इस काम के लिए फंडिंग करने को तैयार हों. बड़ी कारोबारी और व्यावसायिक प्रयोगशालाओं, जहां सभी जरूरी चीजें और उपकरण मौजूद हों, उनका सहयोग हासिल करने की भी कोशिश की जानी चाहिए.

मैं जानता हूं कि जर्मनी ने चेकोस्लोवाकिया की खदानों से निकलने वाले यूरेनियम को बेचना बंद कर दिया है. फिलहाल उन खदानों पर जर्मनी का ही कब्जा है. उसने इतनी जल्दी ये फैसला क्यों लिया, इसे शायद इस तरीके से समझा जा सके. जर्मन अंडर-सेक्रेटरी ऑफ स्टेट का बेटा बर्लिन स्थित उस कैसर-विल्हेम इंस्टिट्यूट के साथ जुड़ा हुआ है, जहां अमेरिका द्वारा यूरेनियम पर किए गए कुछ प्रयोगों और कामों को दोहराया जा रहा है.

आपका
अल्बर्ट आइंस्टाइन


अमेरिका ने जापान पर जब बम गिराया, तब तक जर्मनी हथियार डाल चुका था. हिटलर के नेतृत्व में जिस नाजी ऐटमिक बम की आशंका के मद्देनजर आइंस्टाइन ने रूजवेल्ट को चिट्ठी लिखी थी, वो टल चुका था. हिरोशिमा और नागासाकी पर हमले के एक साल तक आइंस्टाइन चुप रहे. उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की. न्यू यॉर्क टाइम्स के पहले पेज पर एक छोटा सा लेख था. उसमें एक छोटी सी पंक्ति में आइंस्टाइन की प्रतिक्रिया थी. इसमें जो लिखा था, वो आइंस्टाइन की हताशा के शब्द थे. लेख का शीर्षक था- आइंस्टाइन डिप्लोर्स यूज ऑफ ऐटम बम. तारीख थी, 19 अगस्त 1946. अखबार ने लिखा था:

प्रफेसर अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा कि अगर राष्ट्रपति रूजवेल्ट जिंदा होते, तो जापान पर परमाणु हमला नहीं होने देते. जापान पर हमला इसलिए किया गया, ताकि रूस के शामिल होने से पहले ही प्रशांत महासागर के मोर्चे पर चल रही लड़ाई खत्म की जा सके.

आइंस्टाइन ने बाद में लिखा:

जापान के खिलाफ परमाणु बम के इस्तेमाल की मैंने हमेशा ही निंदा की. ये गलत था. बहुत गलत.
आइंस्टाइन को अपनी लिखी इस चिट्ठी पर तमाम उम्र मलाल रहा. ऐटम बम के निर्माण में अपनी भूमिका पर उन्हें बहुत तकलीफ थी. नवंबर 1954 में अपनी मौत (18 अप्रैल, 1955) के 5 महीने पहले उन्होंने लिखा:

*मैंने अपनी जिंदगी में ये एक बड़ी गलती की है. जब मैंने राष्ट्रपति रूजवेल्ट को भेजी जाने वाली उस चिट्ठी, जिसमें कि ऐटम बम बनाए जाने की अनुशंसा की गई थी, पर दस्तखत किया, तो वो मेरी गलती थी. उस समय उसके पीछे एक तर्क था. जर्मनी के हाथों परमाणु हथियार विकसित किए जाने का खतरा*

 
62
 
60 days
 
Sam's Son

🌷🍯🌷 😇 🌷🍯🌷

*रसोई में स्वास्थ्य !*

🍌 नमक केवल सेन्धा प्रयोग करें। थायराइड, बी पी, पेट ठीक होगा।

🍎 कुकर स्टील का ही काम में लें। एल्युमिनियम में मिले lead से होने वाले नुकसानों से बचेंगे।
🌽 तेल कोई भी रिफाइंड न खाकर, तिल्ली, सरसों, मूंगफली, नारियल प्रयोग करें। रिफाइंड में बहुत केमिकल होते हैं।
🍒 सोयाबीन बड़ी को 2 घण्टे भिगो कर, मसल कर ज़हरीली झाग निकल कर ही प्रयोग करें।
🥑 रसोई में एग्जास्ट फैन जरूरी है, प्रदूषित हवा बाहर करें।
🍎 काम करते समय स्वयं को अच्छा लगने वाला संगीत चलाएं। खाने में अच्छा प्रभाव आएगा और थकान कम होगी।

🍂 ज्यादा से ज्यादा मीठा नीम/कढ़ी पत्ता खाने की चीजों में डालें, सभी का स्वास्थ्य ठीक करेगा।

🌶 ज्यादा चीजें लोहे की कढ़ाई में ही बनाएं। आयरन की कमी किसी को नहीं होगी।

🍌 भोजन का समय ( Timing ) निश्चित करें, पेट ठीक रहेगा। भोजन के बीच बात न करें, भोजन ज्यादा पोषण देगा।
🧀 नाश्ते में अंकुरित अन्न शामिल करें। पोषक विटामिन, फाइबर मिलेंगें।
🥝 चीनी की जगह गुड़ लें।

🍳 छौंक में राई के साथ कलौंजी का भी प्रयोग करें, फायदे इतने कि लिख ही नहीं सकते।
☕ चाय के समय, आयुर्वेदिक पेय की आदत बनाएं व निरोग रहेंगे।
🛢 डस्ट बिन एक रसोई में एक बाहर रखें, सोने से पहले रसोई का कचरा बाहर के डस्ट बिन में डालें।
🥗 रसोई में घुसते ही नाक में घी या सरसों तेल लगाएं, सर और फेफड़े स्वस्थ रहेंगें।

🥕 करेले, मैथी, मूली याने कड़वी सब्जियां भी खाएँ, रक्त शुद्ध रहेगा।

🍋 पानी ज्यादा ठंडा न पिएं, पाचन व दांत ठीक रहेंगे।

🍊 रसोई में घुसते ही थोड़े ड्राई फ्रूट (काजू की जगह तरबूज के बीज) खायें, एनर्जी बनी रहेगी।
🍐 प्लास्टिक, एल्युमिनियम रसोई से हटाये, केन्सर कारक हैं।

🍉 खाने की ठंडी चीजें कम से कम खाएँ, पेट और दांत को खराब करती हैं।

🍑 तली चीजें छोड़ें, वजन, पेट, एसिडिटी ठीक रहेंगी।

🥕 मैदा, बेसन, छौले, राजमां, उड़द कम खाएँ, गैस की समस्या से बचेंगे।
🥒 अदरक, अजवायन का प्रयोग बढ़ाएं, गैस और शरीर के दर्द कम होंगे।

🍹 पानी का correct TDS प्रयोग करें I
🍫 रात को आधा चम्मच त्रिफला एक कप पानी में डाल कर रखें, सुबह कपड़े से छान कर eye wash cup में डाल कर आंखें धोएं, चश्मा उतर जाएगा। छान कर जो पाउडर बचे उसे फिर एक गिलास पानी में डाल कर रख दें। रात को पी जाएं। पेट साफ होगा, कोई रोग एक साल में नहीं रहेगा।
🍆.सुबह रसोई में चप्पल न पहनें I
🍌 रात का भिगोया आधा चम्मच कच्चा जीरा सुबह खाली पेट चबा कर वही पानी पिएं, एसिडिटी खतम।
🍆 एक्यू प्रेशर वाले पिरामिड प्लेटफार्म पर खड़े होकर खाना बनाने की आदत बना लें तो भी सब बीमारी शरीर से निकल जायेगी।
🍈 चौथाई चम्मच दालचीनी का कुल उपयोग दिन भर में किसी भी रूप में करने पर निरोगता अवश्य होगी।
🍑 सर्दियों में नाखून बराबर जावित्री कभी चूसने से सर्दी के असर से बचाव होगा।
🌶 सर्दी में बाहर जाते समय, 2 चुटकी अजवायन मुहं में रखकर निकलिए, सर्दी से नुकसान नहीं होगा।
🍩 रस निकले नीबू के चौथाई टुकड़े में जरा सी हल्दी, नमक, फिटकरी रखकर दांत मलने से दांतों का कोई भी रोग नहीं रहेगा।
🌯 कभी कभी नमक में, हल्दी में 2 बून्द सरसों का तेल डाल कर दांतों को उंगली से साफ करें, दांतों का कोई रोग टिक ( exist ) नहीं सकता।
🍑 बुखार में 1 लीटर पानी उबाल कर 250 ml कर लें, साधारण ताप पर आ जाने पर रोगी को थोड़ा थोड़ा दें, दवा का काम करेगा।
🍐 सुबह के खाने के साथ घर का जमाया ताजा दही जरूर शामिल करें I
🥝 सूरज डूबने के बाद दही या दही से बनी कोई चीज and cucumber न खाएं ज्यादा उम्र में दमा ( Asthma ) हो सकता है।

🍛 दहीबड़े सिर्फ मूंग की दाल के बनने चहिये, उड़द के नुकसान करते हैं।

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73 days
 
DDLJ143

*स्नान कब ओर केसे करे घर की समृद्धि बढाना हमारे हाथमे है*
सुबह के स्नान को धर्म शास्त्र में चार उपनाम दिए है।

*1* *मुनि स्नान।*
जो सुबह 4 से 5 के बिच किया जाता है।
.
*2* *देव स्नान।*
जो सुबह 5 से 6 के बिच किया जाता है।
.
*3* *मानव स्नान।*
जो सुबह 6 से 8 के बिच किया जाता है।
.
*4* *राक्षसी स्नान।*
जो सुबह 8 के बाद किया जाता है।

▶मुनि स्नान सर्वोत्तम है।
▶देव स्नान उत्तम है।
▶मानव स्नान समान्य है।
▶राक्षसी स्नान धर्म में निषेध है।
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किसी भी मानव को 8 बजे के बाद स्नान नही करना चाहिए।
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*मुनि स्नान .......*
👉🏻घर में सुख ,शांति ,समृद्धि, विध्या , बल , आरोग्य , चेतना , प्रदान करता है।
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*देव स्नान ......*
👉🏻 आप के जीवन में यश , किर्ती , धन वैभव,सुख ,शान्ति, संतोष , प्रदान करता है।
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*मानव स्नान.....*
👉🏻काम में सफलता ,भाग्य ,अच्छे कर्मो की सूझ ,परिवार में एकता , मंगल मय , प्रदान करता है।
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*राक्षसी स्नान.....*
👉🏻 दरिद्रता , हानि , कलेश ,धन हानि , परेशानी, प्रदान करता है ।
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किसी भी मनुष्य को 8 के बाद स्नान नही करना चाहिए।
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पुराने जमाने में इसी लिए सभी सूरज निकलने से पहले स्नान करते थे।

*खास कर जो घर की स्त्री होती थी।* चाहे वो स्त्री माँ के रूप में हो,पत्नी के रूप में हो,बेहन के रूप में हो।
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घर के बडे बुजुर्ग यही समझाते सूरज के निकलने से पहले ही स्नान हो जाना चाहिए।
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*ऐसा करने से धन ,वैभव लक्ष्मी, आप के घर में सदैव वास करती है।*
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उस समय...... एक मात्र व्यक्ति की कमाई से पूरा हरा भरा पारिवार पल जाता था , और आज मात्र पारिवार में चार सदस्य भी कमाते है तो भी पूरा नही होता।
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उस की वजह हम खुद ही है । पुराने नियमो को तोड़ कर अपनी सुख सुविधा के लिए नए नियम बनाए है।
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प्रकृति ......का नियम है, जो भी उस के नियमो का पालन नही करता ,उस का दुष्टपरिणाम सब को मिलता है।
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इसलिए अपने जीवन में कुछ नियमो को अपनाये । ओर उन का पालन भी करे।
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आप का भला हो ,आपके अपनों का भला हो।
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मनुष्य अवतार बार बार नही मिलता।
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अपने जीवन को सुखमय बनाये।

जीवन जीने के कुछ जरूरी नियम बनाये।
☝🏼 *याद रखियेगा !* 👇🏽
*संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है।*
*सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोए।*
*पर संस्कार नहीं दिए तो वे जिंदगी भर रोएंगे।*
ऊपर जाने पर एक सवाल ये भी पूँछा जायेगा कि अपनी अँगुलियों के नाम बताओ ।
जवाब:-
अपने हाथ की छोटी उँगली से शुरू करें :-
(1)जल
(2) पथ्वी
(3)आकाश
(4)वायू
(5) अग्नि
ये वो बातें हैं जो बहुत कम लोगों को मालूम होंगी ।

5 जगह हँसना करोड़ो पाप के बराबर है
1. श्मशान में
2. अर्थी के पीछे
3. शौक में
4. मन्दिर में
5. कथा में

सिर्फ 1 बार भेजो बहुत लोग इन पापो से बचेंगे ।।

अकेले हो?
परमात्मा को याद करो ।

परेशान हो?
ग्रँथ पढ़ो ।

उदास हो?
कथाए पढो ।

टेन्शन मे हो?
भगवत गीता पढो ।

फ्री हो?
अच्छी चीजे फोरवार्ड करो
हे परमात्मा हम पर और समस्त प्राणियो पर कृपा करो......

सूचना
क्या आप जानते हैं ?
हिन्दू ग्रंथ रामायण, गीता, आदि को सुनने,पढ़ने से कैन्सर नहीं होता है बल्कि कैन्सर अगर हो तो वो भी खत्म हो जाता है।

व्रत,उपवास करने से तेज़ बढ़ता है,सर दर्द और बाल गिरने से बचाव होता है ।
आरती----के दौरान ताली बजाने से
दिल मजबूत होता है ।

ये मेसेज असुर भेजने से रोकेगा मगर आप ऐसा नही होने दे और मेसेज सब नम्बरो को भेजे ।

श्रीमद भगवत गीता पुराण और रामायण ।
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''कैन्सर"
एक खतरनाक बीमारी है...
बहुत से लोग इसको खुद दावत देते हैं ...
बहुत मामूली इलाज करके इस
बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है ...

अक्सर लोग खाना खाने के बाद "पानी" पी लेते है ...
खाना खाने के बाद "पानी" ख़ून में मौजूद "कैन्सर "का अणु बनाने वाले '''सैल्स'''को '''आक्सीजन''' पैदा करता है...

''हिन्दु ग्रंथो मे बताया गया है कि...

खाने से पहले'पानी 'पीना
अमृत"है...

खाने के बीच मे 'पानी ' पीना शरीर की
''पूजा'' है...

खाना खत्म होने से पहले 'पानी'
''पीना औषधि'' है...

खाने के बाद 'पानी' पीना"
बीमारीयो का घर है...

बेहतर है खाना खत्म होने के कुछ देर बाद 'पानी 'पीये...

ये बात उनको भी बतायें जो आपको "जान"से भी ज्यादा प्यारे है...

जय श्री राम

रोज एक सेब
नो डाक्टर ।

रोज पांच बदाम,
नो कैन्सर ।

रोज एक निबु,
नो पेट बढना ।

रोज एक गिलास दूध,
नो बौना (कद का छोटा)।

रोज 12 गिलास पानी,
नो चेहेरे की समस्या ।

रोज चार काजू,
नो भूख ।

रोज मन्दिर जाओ,
नो टेन्शन ।

रोज कथा सुनो
मन को शान्ति मिलेगी ।।


"चेहरे के लिए ताजा पानी"।

"मन के लिए गीता की बाते"।

"सेहत के लिए योग"।

और खुश रहने के लिए परमात्मा को याद किया करो ।

अच्छी बाते फैलाना पुण्य है.किस्मत मे करोड़ो खुशियाँ लिख दी जाती हैं ।
जीवन के अंतिम दिनो मे इन्सान इक इक पुण्य के लिए तरसेगा ।

जब तक ये मेसेज भेजते रहोगे मुझे और आपको इसका पुण्य मिलता रहेगा...

जय श्री राम

 
196
 
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akshay parekh
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