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अगर चूहा पत्थर का हो तो सब उसे पूजते हैं, मगर जिन्दा हो तो मारे बिना साँस नहीं लेते...|
सांप अगर पत्थर का हो, तो सब पूजते हैं मगर जिन्दा हो तो उसे पकड़वा कर जंगल में छोड़ने की बजाय मार देते है...।
औरत अगर पत्थर की हो तो देवी समझ कर सब पूजते हैं, माँ कहते है मगर जिन्दा है तो मारते हैं नोचते हैं, रेप करते हैं.!
बस यही समझ में नहीं आता कि जिंदगी से इतनी नफरत क्यों.....
और पत्थरों से इतनी मोहब्बत क्यों..?

 
260
 
328 days
 
Jasmine

पतझड़ में सिर्फ पत्ते गिरते हैं.,
नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता...

 
235
 
362 days
 
Jasmine

जिम्मेदारी और प्रमोशन ...

हमारे घर के हाॅल में दो पंखे लगे हैं , जिनमें एक ही अक्सर चलता है और वही धूल लगकर गंदा हो जाता है।
जबकि जो नही चलता वह साफ रहता है |

बाहर से आने वाले उसी साफ दिखने वाले पंखे की तारीफ करते हैं जो नही चलता और कहते हैं कि उसी की तरह इस पंखे को साफ रखा करो !

क्या *जवाब* दूं ? उन्हें कैसे समझाऊं कि जो *जिम्मेदारी* लेता है वही गंदा होता हैं |

"मशहूर हुए वो जो कभी क़ाबिल ना थे और तो और....
कमबख़्त मंजिल भी उन्हें मिली जो दौड़ में कभी शामिल ना थे

 
227
 
308 days
 
Jasmine

नहलाकर बाल बनाने के बाद माँ माथे पर काजल से एक जो काला टीका बना दिया करती थी,
Z+ सिक्योरिटी भी क्या मुकाबला करेगी उसका.

 
186
 
282 days
 
V!shu

*ख़ुशी मनाने के लिए किसी मुहूर्त की जरुरत नही होती...*
*क्योंकि जो ख़ुशी का पल होता है वह खुद में ही ,*
*मुहूर्त होता है...*😊😊💕

 
167
 
258 days
 
aaakash

*ऐ तकदीर,*
*ला तेरे हाथों की उँगलियाँ दबा दूँ मैं,*
*थक गई होगी मुझे नचाते नचाते...*

 
156
 
298 days
 
Jasmine

वक्त ने फंसाया है लेकिन परेशान मै हीँ हूँ

हालातों से हार जाऊँ मै वो इंसान नहीँ हूँ ✌✌

 
150
 
294 days
 
aaakash

इंसान जितना ऑनलाइन होता जा रहा है..!
इंसानियत उतनी ही ऑफलाइन होती जा रही है..!

 
148
 
209 days
 
aaakash

खतरे के
निशान से ऊपर बह रहा है
उम्र का पानी...

वक़्त की बरसात है कि
थमने का नाम नहीं
ले रही...

आज दिल कर रहा था,
बच्चों की तरह रूठ ही जाऊँ,
पर...

फिर सोचा,
उम्र का तकाज़ा है,
मनायेगा कौन...

रखा करो नजदीकियां,
ज़िन्दगी का कुछ भरोसा
नहीं...

फिर मत कहना
चले भी गए
और बताया भी नहीं...

चाहे जिधर से गुज़रिये,
मीठी सी हलचल
मचा दीजिये...

उम्र का हरेक दौर मज़ेदार है,
अपनी उम्र का
मज़ा लिजिये...

"सदा मुस्कुराते रहिये"

 
138
 
121 days
 
Jasmine

पढोगे तो रो पड़ोगे

जीवन के 20 साल हवा की तरह उड़ गए । फिर शुरू हुई नोकरी की खोज । ये नहीं वो, दूर नहीं पास । ऐसा करते करते 2 3 नोकरियाँ छोड़ते एक तय हुई। थोड़ी स्थिरता की शुरुआत हुई।

फिर हाथ आया पहली तनख्वाह का चेक। वह बैंक में जमा हुआ और शुरू हुआ अकाउंट में जमा होने वाले शून्यों का अंतहीन खेल। 2- 3 वर्ष और निकल गए। बैंक में थोड़े और शून्य बढ़ गए। उम्र 25 हो गयी।

और फिर विवाह हो गया। जीवन की राम कहानी शुरू हो गयी। शुरू के एक 2 साल नर्म, गुलाबी, रसीले, सपनीले गुजरे । हाथो में हाथ डालकर घूमना फिरना, रंग बिरंगे सपने। पर ये दिन जल्दी ही उड़ गए।

और फिर बच्चे के आने ही आहट हुई। वर्ष भर में पालना झूलने लगा। अब सारा ध्यान बच्चे पर केन्द्रित हो गया। उठना बैठना खाना पीना लाड दुलार ।

समय कैसे फटाफट निकल गया, पता ही नहीं चला।
इस बीच कब मेरा हाथ उसके हाथ से निकल गया, बाते करना घूमना फिरना कब बंद हो गया दोनों को पता ही न चला।

बच्चा बड़ा होता गया। वो बच्चे में व्यस्त हो गयी, मैं अपने काम में । घर और गाडी की क़िस्त, बच्चे की जिम्मेदारी, शिक्षा और भविष्य की सुविधा और साथ ही बैंक में शुन्य बढाने की चिंता। उसने भी अपने आप काम में पूरी तरह झोंक दिया और मेने भी

इतने में मैं 35 का हो गया। घर, गाडी, बैंक में शुन्य, परिवार सब है फिर भी कुछ कमी है ? पर वो है क्या समझ नहीं आया। उसकी चिड चिड बढती गयी, मैं उदासीन होने लगा।

इस बीच दिन बीतते गए। समय गुजरता गया। बच्चा बड़ा होता गया। उसका खुद का संसार तैयार होता गया। कब 10वि आई और चली गयी पता ही नहीं चला। तब तक दोनों ही चालीस बयालीस के हो गए। बैंक में शुन्य बढ़ता ही गया।

एक नितांत एकांत क्षण में मुझे वो गुजरे दिन याद आये और मौका देख कर उस से कहा " अरे जरा यहाँ आओ, पास बैठो। चलो हाथ में हाथ डालकर कही घूम के आते हैं।"

उसने अजीब नजरो से मुझे देखा और कहा कि "तुम्हे कुछ भी सूझता है यहाँ ढेर सारा काम पड़ा है तुम्हे बातो की सूझ रही है ।"
कमर में पल्लू खोंस वो निकल गयी।

तो फिर आया पैंतालिसवा साल, आँखों पर चश्मा लग गया, बाल काला रंग छोड़ने लगे, दिमाग में कुछ उलझने शुरू हो गयी।

बेटा उधर कॉलेज में था, इधर बैंक में शुन्य बढ़ रहे थे। देखते ही देखते उसका कॉलेज ख़त्म। वह अपने पैरो पे खड़ा हो गया। उसके पंख फूटे और उड़ गया परदेश।

उसके बालो का काला रंग भी उड़ने लगा। कभी कभी दिमाग साथ छोड़ने लगा। उसे चश्मा भी लग गया। मैं खुद बुढा हो गया। वो भी उमरदराज लगने लगी।

दोनों पचपन से साठ की और बढ़ने लगे। बैंक के शून्यों की कोई खबर नहीं। बाहर आने जाने के कार्यक्रम बंद होने लगे।

अब तो गोली दवाइयों के दिन और समय निश्चित होने लगे। बच्चे बड़े होंगे तब हम साथ रहेंगे सोच कर लिया गया घर अब बोझ लगने लगा। बच्चे कब वापिस आयेंगे यही सोचते सोचते बाकी के दिन गुजरने लगे।

एक दिन यूँ ही सोफे पे बेठा ठंडी हवा का आनंद ले रहा था। वो दिया बाती कर रही थी। तभी फोन की घंटी बजी। लपक के फोन उठाया। दूसरी तरफ बेटा था। जिसने कहा कि उसने शादी कर ली और अब परदेश में ही रहेगा।

उसने ये भी कहा कि पिताजी आपके बैंक के शून्यों को किसी वृद्धाश्रम में दे देना। और आप भी वही रह लेना। कुछ और ओपचारिक बाते कह कर बेटे ने फोन रख दिया।

मैं पुन: सोफे पर आकर बेठ गया। उसकी भी दिया बाती ख़त्म होने को आई थी। मैंने उसे आवाज दी "चलो आज फिर हाथो में हाथ लेके बात करते हैं "
वो तुरंत बोली " अभी आई"।

मुझे विश्वास नहीं हुआ। चेहरा ख़ुशी से चमक उठा।आँखे भर आई। आँखों से आंसू गिरने लगे और गाल भीग गए । अचानक आँखों की चमक फीकी पड़ गयी और मैं निस्तेज हो गया। हमेशा के लिए !!

उसने शेष पूजा की और मेरे पास आके बैठ गयी "बोलो क्या बोल रहे थे?"

लेकिन मेने कुछ नहीं कहा। उसने मेरे शरीर को छू कर देखा। शरीर बिलकुल ठंडा पड गया था। मैं उसकी और एकटक देख रहा था।

क्षण भर को वो शून्य हो गयी।
" क्या करू ? "

उसे कुछ समझ में नहीं आया। लेकिन एक दो मिनट में ही वो चेतन्य हो गयी। धीरे से उठी पूजा घर में गयी। एक अगरबत्ती की। इश्वर को प्रणाम किया। और फिर से आके सोफे पे बैठ गयी।

मेरा ठंडा हाथ अपने हाथो में लिया और बोली
"चलो कहाँ घुमने चलना है तुम्हे ? क्या बातें करनी हैं तुम्हे ?" बोलो !!

ऐसा कहते हुए उसकी आँखे भर आई !!......
वो एकटक मुझे देखती रही। आँखों से अश्रु धारा बह निकली। मेरा सर उसके कंधो पर गिर गया। ठंडी हवा का झोंका अब भी चल रहा था।

क्या ये ही जिन्दगी है ? नहीं ??

सब अपना नसीब साथ लेके आते हैं इसलिए कुछ समय अपने लिए भी निकालो । जीवन अपना है तो जीने के तरीके भी अपने रखो। शुरुआत आज से करो। क्यूंकि कल कभी नहीं आएगा! .......

 
128
 
219 days
 
Jasmine
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