Wisdom (17695)

*परीक्षा हमेशा अकेले में होती हैं..*
*लेकिन उसका परिणाम सबके सामने होता है।*
*इसलिए कोई भी कर्म करने से पहले*
*परिणाम का जरूर विचार करें ...*🙏

 
177
 
a day
 
anil Manawat

*•माँ बाप की सख्ती बर्दाश करो, ताकी काबील बन सको,*
*•माँ बाप की बातें गौर से सुनो, ताकी दुसरो की न सुननी पड़े,*
*•माँ बाप के सामने ऊंचा मत बोलो वरना भगवान् तुमको निचा कर देगा,*
*•माँ बाप से शर्म करो, ताकी तुम्हारी औलाद तुम्हारी शर्म करे,*
*•माँ बाप की इज्जत करो, ताकी दनिया में तुमको भी इज्जत मिले,*
*•माँ बाप का हुक्म मानो, ताकी खुश हाल रह सको,*
*•माँ बाप के सामने नजरे झुका कर रखो, ताकी भगवान तुमको दुनियां मे बुलंद करे,*
*•माँ बाप एक किताब है जिसपर तजुर्बा लिखा जाता है,*
*•माँ बाप के आंसु तुम्हारे सामने न गिरे, वरना भगवान तुम्हे स्वर्ग से गिरा देगा,*
*माँ बाप की सेवा करो ताकि तुम्हे भी तीर्थो में ना जाना पड़े*

 
72
 
2 days
 
anil Manawat

*सभी को सुख देने की क्षमता*
*भले ही आप के हाथ में न हो...!*

*किन्तु किसी को दुख न पहुँचे*
*यह तो आप के हाथ में ही है..*!!🙏

 
252
 
4 days
 
anil Manawat

*प्रकृर्ति ने सिर्फ दो ही रास्ते दिए है*

*1. या तो देकर जाए*

*2. या फिर छोड़कर जाए*

*"साथ ले जाने की कोई व्यवस्था नही"*

*🙏🙏*

 
248
 
5 days
 
anil Manawat

*मोबाईल और दिमाग में...*

*अनावश्यक डेटा* संग्रह ना करें!

*अन्यथा "स्पीड" कम हो जायेगी !!*

 
204
 
5 days
 
SPARSH

आजकल की ज़िंदगी में..

"हँसते हँसते " जीने का
मज़ा ही कुछ और होता है.....

वरना "रोते रोते" जीना से
अक्सर तकलीफ़े बड़ जाती है....🙏

 
119
 
6 days
 
anil Manawat

*_BEAUTFUL STORY_*

एक घर मे *पांच दिए* जल रहे थे।

एक दिन पहले एक दिए ने कहा -

इतना जलकर भी *मेरी रोशनी की* लोगो को *कोई कदर* नही है...

तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं।

वह दिया खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गया ।

जानते है वह दिया कौन था ?

वह दिया था *उत्साह* का प्रतीक ।

यह देख दूसरा दिया जो *शांति* का प्रतीक था, कहने लगा -

मुझे भी बुझ जाना चाहिए।

निरंतर *शांति की रोशनी* देने के बावजूद भी *लोग हिंसा कर* रहे है।

और *शांति* का दिया बुझ गया ।

*उत्साह* और *शांति* के दिये के बुझने के बाद, जो तीसरा दिया *हिम्मत* का था, वह भी अपनी हिम्मत खो बैठा और बुझ गया।

*उत्साह*, *शांति* और अब *हिम्मत* के न रहने पर चौथे दिए ने बुझना ही उचित समझा।

*चौथा* दिया *समृद्धि* का प्रतीक था।

सभी दिए बुझने के बाद केवल *पांचवां दिया* *अकेला ही जल* रहा था।

हालांकि पांचवां दिया सबसे छोटा था मगर फिर भी वह *निरंतर जल रहा* था।

तब उस घर मे एक *लड़के* ने प्रवेश किया।

उसने देखा कि उस घर मे सिर्फ *एक ही दिया* जल रहा है।

वह खुशी से झूम उठा।

चार दिए बुझने की वजह से वह दुखी नही हुआ बल्कि खुश हुआ।

यह सोचकर कि *कम से कम* एक दिया तो जल रहा है।

उसने तुरंत *पांचवां दिया उठाया* और बाकी के चार दिए *फिर से* जला दिए ।

जानते है वह *पांचवां अनोखा दिया* कौन सा था ?

वह था *उम्मीद* का दिया...

इसलिए *अपने घर में* अपने *मन में* हमेशा उम्मीद का दिया जलाए रखिये ।

चाहे *सब दिए बुझ जाए* लेकिन *उम्मीद का दिया* नही बुझना चाहिए ।

ये एक ही दिया *काफी* है बाकी *सब दियों* को जलाने के लिए॥

*॥ शुभ दिन ॥*

 
220
 
6 days
 
SPARSH

*इच्छाएँ" बड़ी बेवफ़ा होती हैं*

*कमबख्त, पूरी होते ही, बदल जाती हैं*🙏

 
280
 
7 days
 
anil Manawat

*जब आप ऊंचाइयों की सीढ़ियां चढ़ रहे हों तो पीछे छूटे लोगों से बहुत अच्छा व्यवहार करें।*

*क्योंकि उतरते समय ये सभी रास्ते में फिर मिलेंगे।।*

 
256
 
7 days
 
DDLJ143

*एक मिनट का समय लगता है रिश्तो का मजाक उड़ाने में,*

*और सारी उम्र बीत जाती है एक रिश्ते को बनाने में ।* 🙏

 
236
 
9 days
 
anil Manawat
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